Wednesday, May 27, 2009

जीवन का राज़




परियों की रानी बोलती है

दीवार में चुप चुप के जीवन का आध्यात्मिक राज़ बोलती है

जीवन में सब कुछ क्षण भंगुर है

कल की आयु आज के चैन में है

किसी ने पूछा नही, किसी ने सुना नही, किसी ने समझा नही

आख़िर अन्तिम साँस लपेटे हुए ऊपर का भी मेहमान बनके चलते हैं

आंखों में आँसू पोंछ्के वो फ़िर से बोलती है

आज एक अनमोल रत्न है

यही है जीवन का आध्यात्मिक

2 butterflies in the garden:

CM-Chap said...

I need a Hindi translator to understand this :(

smilie said...

@Chap,

The poem says, Today" is a gift.Tomorrow's happiness is today's deeds.So live your today.

My paintings MyPaintings